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सावन के सोमवार में मिलेगा मनचाहा वरदान , बनेगा सर्वार्थ सिद्धि योग

इस बार सावन के सोमवार 10 जुलाई से शुरू हो रहे हैं। इसके लिये हर जगह तैयारियां शुरू की जा चुकी हैं। भगवान शिव की आराधना के लिये भारत में तैयारियां शुरु की जा चुकी हैं। सावन  का महीना भगवान शिव का प्रिय माह होता है। इस बार सावन के सोमवार का विशेष योग का बन रहा है। इस योग में व्रत रखने से मनचाहा फल मिलेगा। इस  बार सावन के महीने में पांच सोमवार हैं। ये पवित्र माह सोमवार से ही शुरू होगा और 7 अगस्त (सोमवार) को ही इसका समापन होगा। ये खास योग कई वर्षों के बाद ही बनता है।

 

इस सावन बनेगा सर्वार्थ सिद्धि योग

 इस बार सावन माह में तीन सोमवार सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। पहला सोमवार सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू होगा और आखिरी सोमवार के सर्वार्थ सिद्धि योग में खत्म भी होगा। सर्वार्थ सिद्धि योग का समय़ बहुत ही शुभ माना जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग मतलब होता है अपने आप में सिद्ध। अगर आप इस दिन कोई पूजा या हवन-यज्ञ करेंगे तो आपको काफी फायदा मिलेगा।

रोटक व्रत की महत्ता

सावन के महीने में रोटक व्रत की भी काफी महत्ता होती है। सावन माह में अगर पांच सोमवार होते हैं तो वह रोटक व्रत कहलाता है। इसमें भगवान शिव-पार्वती की प्रीति के लिए व्रत रखकर शिवजी की बेलपत्र, दूध, दही, चावल, पुष्प, गंगाजल सहित पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है। परुन्त भगवान शिव की पूजा से पहले हमेशा माँ पारवती की पूजा करनी चाहिए क्युकी ऐसा मना  जाता है की पहले माँ पारवती की आज्ञा लेकर ही भोलेनाथ को पूजना चाहिए, सावन के सोमवार को कुवारी कन्याओ को व्रत करने से मनचाहा ,सुयोग्य अवं गुड़ी वर प्राप्त होता है .आखिरी सोमवार को रक्षा बंधन रहेगा। इस दिन चंद्रग्रहण का साया भी रहेगा।

सावन सोमवार के व्रत की विधि

सावन के सोमवार के दिन में एक समय भोजन करना चाहिए । भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती जी की पुष्प, धूप, दीप और जल से पूजा करनी चाहिए। इसके बाद भगवान शिव को तरह-तरह के नैवेद्य अर्पित करने चाहिए जैसे दूध, जल, कंद मूल आदि। सावन के हर सोमवार को भगवान शिव को जल अवश्य चढ़ाएं। रात को जमीन पर सोएं। इस तरह से सावन के प्रथम सोमवार से शुरु करके कुल नौ या सोलह सोमवार इस व्रत का पालन करना चाहिए। नौवें या सोलहवें सोमवार को व्रत का उद्यापन करना चाहिए। अगर नौ या सोलह सोमवार व्रत करना संभव ना हो तो केवल सावन के चार सोमवार भी व्रत किए जा सकते हैं।

सावन सोमवार की व्रत कथा

अपने भोले स्वभाव के कारण भगवान शिव का एक नाम भोलेनाथ भी है। इसी कारण भगवान शिवजी से जुड़े व्रतों में किसी कड़े नियम का वर्णन पुराणों में नहीं है। साथ ही शास्त्रों के अनुसार सावन सोमवार व्रत में तीन पहर तक उपवास रखने के बाद एक समय भोजन करना चाहिए। सिर्फ सावन सोमवार ही नहीं अन्य शिवजी से जुड़े व्रतों में भी सूर्योदय के बाद तीन पहर (9 घंटे) तक उपवास रखना चाहिए। साथ ही भगवान शिव की प्रिय वस्तुएं जैसे भांग- धतुरा आदि उनकी पूजा में अवश्य रखने का प्रयत्न करना चाहिए।

 

 

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